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एक वक्त गुजरा और एक वक्त आया,!तब सब खोया था और अब तक क्या पाया,!जिंदगी के समंदर में हम गोते लगाते चले गये,!कभी लहरों से चोटे खाई,!तो कभी खुद को मझधार ...